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गोरखपुर ने AI से रोकी बाढ़ और कर दिया कमाल, जानें इसका फ्लड मैनेजमेंट कैसे करता है काम

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मानना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल ट्विन टेक्नोलॉजी और फ्लड मॉडलिंग जैसी आधुनिक तकनीकें लोगों की जिंदगी आसान बनाने में मदद कर सकती हैं. वह लगातार इस दिशा में प्रयासरत हैं. उनके इसी विजन को धरातल पर उतारने के लिए गोरखपुर नगर निगम ने AI आधारित अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सिस्टम बनाया है. इस सिस्टम से मानसून के समय पानी भरने की समस्या में 65 प्रतिशत से ज्यादा सुधार हुआ है.

इसके अलावा गोरखपुर में देश का पहला AI-आधारित अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सेल (UFMC) भी स्थापित किया गया है, जिसे प्रधानमंत्री कार्यालय और नीति आयोग ने भी सराहा है। नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल के अनुसार, UFMC स्थापित करने से 24 घंटे पहले ही वर्षा व जलभराव का पूर्वानुमान 80 प्रतिशत से अधिक सटीक रहा है. ट्रायल फेज में 250 से अधिक शिकायतों में से 70 प्रतिशत का समाधान कुछ घंटों में हो गया. जबकि पूरी प्रणाली की दक्षता में 65 प्रतिशत से अधिक का सुधार देखा गया. 

गोरखपुर मॉडल देशभर के शहरी निकायों के लिए उदाहरण

इस प्रणाली में AI आधारित वर्षा पूर्वानुमान, सेंसर द्वारा पानी का स्तर मापना और स्टॉर्म वाटर मॉडलिंग को एकीकृत किया गया है. जैसे ही जलस्तर बढ़ता है, सेंसर अलर्ट भेज देता है और ऑटोमेटेड पंपिंग सिस्टम तुरंत चालू हो जाता है, जिससे जलभराव वाले इलाकों को तुरंत समाधान मिल जाता है. नीति आयोग ने अपने मूल्यांकन में पाया कि गोरखपुर मॉडल डेटा-आधारित पूर्वानुमान देश के शहरों में आपदा से निपटने की क्षमता बढ़ा को सकता है. यह मॉडल प्रतिक्रियात्मक (Reactive) वाला ही नहीं, बल्कि पहले से ही तैयारी करने के लिए सक्रिय (Proactive) तरिका है. इससे शहरी प्रबंधन की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना गया है.

दो प्रमुख पहलुओं पर किया गया कार्य

इस अर्बन फ्लड मैनेजमेंट सेल (UFMC ) का उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 23 जुलाई 2025 को किया था. यह एक स्मार्ट सिस्टम है जो बारिश और बाढ़ के खतरे की पहले से चेतावनी देता है, जिससे सही निर्णय लेने में मदद मिलती है. नगर आयुक्त ने बताया कि शहरों में बाढ़ के जोखिम से निपटने के लिए दो प्रमुख पहलुओं पर कार्य किया गया है. पहला, अर्बन फ्लड अर्ली वार्निंग सिस्टम, जो नागरिकों को तत्काल राहत प्रदान करने के लिए चेतावनी और वास्तविक समय पर सूचना उपलब्ध कराता है. दूसरा, डिसीजन सपोर्ट सिस्टम, जो शहर के लिए दीर्घकालिक योजना और नीति निर्माण में सहायता प्रदान करता है  ताकि भविष्य में बाढ़ प्रबंधन क्षमताओं को अधिक मजबूत और प्रभावी बनाया जा सके.

सभी पंपिंग स्टेशनों का पूर्ण ऑटोमेशन

गोरखपुर मॉडल का यह दृष्टिकोण शहर को न केवल वर्तमान आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने में सक्षम बनाता है, बल्कि भविष्य में जनहानि एवं धनहानि के खतरे को भी कम करता है. इस परियोजना के अंतर्गत शहर के सभी महत्त्वपूर्ण नालों, सभी उपकरणों तथा सभी जिम्मेदार अधिकारियों एवं टीमों को उनके संपर्क विवरण सहित मैप किया गया है. शहर में कुल 28 जलभराव हॉटस्पॉट और 85 पॉइंट्स ऑफ इंटरेस्ट चिह्नित किए गए हैं, जो जलभराव की दृष्टि से अधिक संवेदनशील हैं. शहर के सभी पंपिंग स्टेशनों का पूर्ण ऑटोमेशन किया गया है. 24×7 इमरजेंसी कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जो लगातार निगरानी और समन्वय का कार्य करते है. नागरिकों के लिए ग्रीवांस पोर्टल तैयार किया गया है, जिससे किसी भी समस्या की सूचना और उसका त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जा सके.

हर 15 मिनट पर मिलती है बारिश से जुड़ी जानकारी

नगर आयुक्त ने बताया कि शहर में नगर निगम द्वारा दो ऑटोमैटिक रेन गेज भी लगाए गए हैं, जो हर 15 मिनट पर बारिश से जुड़ी जानकारी देते हैं. प्राइमरी व सेकंडरी नालों पर कुल 110 ऑटोमैटिक वाटर लेवल रिकॉर्डर लगाए गए हैं. ये सेंसर हर 2 से 15 मिनट में जलस्तर से संबंधित सूचनाएं भेजते हैं. जब नालों में जलस्तर 80 प्रतिशत से अधिक हो जाता है, तो संबंधित अधिकारियों को ऑटोमेटेड अलर्ट्स पहुंचने लगते हैं. जब संप वेल्स में जलस्तर 60 प्रतिशत से अधिक होता है, ऑटोमेटिक सिस्टम के माध्यम से पंप स्वतः चालू हो जाते हैं. ईंधन की कमी और पंप के रखरखाव से संबंधित चेतावनियां भी अधिकारियों को समय रहते मिल जाती हैं.

यूएफएमसी द्वारा अपनाई जाने वाली रणनीति
 

अब सवाल है कि गोरखपुर का अर्बन फ्लड मॉडल बारिश से पहले यह पता लगा लेता है कि अगले दिन शहर के किन क्षेत्रों में जलभराव हो सकता है? इसके 3 स्टेप हैं, जिसमें पूर्वानुमान करना, तैयार रहना, और सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल हैं. इस पूर्वानुमान के आधार पर एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर संबंधित अधिकारियों को भेजी जाती है, ताकि वे समय रहते तैयारी कर सकें. मोबाइल पंपों व सक्शन मशीनों की व्यवस्था पहले से की जाती है. वर्षा की मात्रा और समय को लेकर एक दिन पहले ही वॉकी-टॉकी के माध्यम से सभी अधिकारियों और फील्ड टीमों को चेतावनी भेज दी जाती है. इसका साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाता है कि सभी पंप सही ढंग से कार्य कर रहै हैं या नहीं और नाले कहीं से जाम तो नहीं.

जलभराव की शिकायतों पर प्रतिक्रिया का समय अब काफी कम

वर्षा जैसे ही शुरू होती है, UFMC का 24×7 आपातकालीन कंट्रोल रूम सक्रिय हो जाता है. नियंत्रण कक्ष से घोषणा कर बताया जाता है कि कौन-कौन से नाले ओवरफ्लो हो रहे हैं, कौन से पॉइंट्स ऑफ इंटरेस्ट उच्च जोखिम में हैं या जलमग्न हो चुके हैं, किन हॉटस्पॉट्स पर मोबाइल पंपों को तुरंत चालू किया जाना चाहिए और किन क्षेत्रों में सक्शन मशीनें तैनात की जानी चाहिए. इससे फील्ड टीमें पूरी तरह सतर्क रहती हैं और उन्हें यह पता होता है कि कहां और क्या कार्रवाई करनी है

शहर के जिन पंपिंग स्टेशनों के संप वेल्स में जलस्तर 60 प्रतिशत से अधिक होता है, उन्हें कंट्रोल रूम से स्वचालित रूप से चालू कर दिया जाता है. यह प्रणाली पिछले 4 महीनों से चल रही है और इसके नतीजे बहुत अच्छे रहे हैं. मसलन, जलभराव की शिकायतों पर प्रतिक्रिया का समय काफी कम हुआ है. पहले 10–12 घंटे लगते थे, अब यह समय 1-2 घंटे से कम हो गया है, खासकर उन जगहों पर जहां पर बार-बार जलभराव होता था. 
 

पंप बंद होने के मामलों में आई 60 प्रतिशत की कमी

इस प्रणाली से पंप बंद होने की घटनाएं 60 प्रतिशत से कम हो गई हैं, क्योंकि अब पंप अपने आप चलते हैं और समय पर उनका अनुरक्षण हो जाता है. 250 से ज़्यादा लोगों ने शिकायतें दर्ज कीं, जिनमें से 70 प्रतिशत से ज़्यादा शिकायतों का हल तुरंत और सही तरीके से किया गया. रीयल टाइम अलर्ट और जल्दी चेतावनी की वजह से कई पुराने जलभराव वाले इलाकों में इस बार बाढ़ नहीं आई. टेक्नोलॉजी से क्षमता एवं दक्षता की वृद्धि हुई है, जिससे टीमें जल्दी और मिलकर काम कर पा रही हैं.
 
पंपिंग स्टेशन अब ऑटोमैटिक हो गए हैं, जिससे मैनुअल काम कम हुआ है और नतीजे ज़्यादा भरोसेमंद साबित हुए हैं. इस नई पहल के माध्यम से गोरखपुर नगर निगम ने न केवल जलभराव की समस्या को कम किया है, बल्कि जवाबदेही, त्वरित प्रतिक्रिया और नागरिक संतुष्टि में भी उल्लेखनीय सुधार किया है.

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