गुजरात में अल्कलाइन वॉटर में मिला जरूरत से ज्यादा ‘फुल्विक एसिड’, इससे किन बीमारियों का खतरा?
Health News India: आजकल लोग खुद को फिट और हेल्दी रखने के लिए कई तरह के हेल्थ ड्रिंक्स और खास पानी का इस्तेमाल कर रहे हैं. इन्हीं में से एक “अल्कलाइन वॉटर” है, जिसे शरीर के लिए फायदेमंद बताकर बेचा जाता है. हालांकि, गुजरात से सामने आई एक खबर ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है. फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी FSSAI ने गुजरात में एक कंपनी के अल्कलाइन वॉटर में ‘फुल्विक एसिड’ और काले कण मिलने के बाद बड़ी कार्रवाई की है. बताया गया कि करीब 31.61 लाख रुपये का स्टॉक जब्त किया गया है. इस खबर के बाद लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर फुल्विक एसिड क्या होता है और इससे शरीर को कितना नुकसान हो सकता है.
जांच में क्या-क्या मिला?
रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला गुजरात के वडोदरा जिले के सावली इलाके से जुड़ा है. FSSAI को एक उपभोक्ता शिकायत मिली थी, जिसके बाद ही कंपनी के प्लांट की जांच की गई. जांच के दौरान अधिकारियों को पानी की बोतलों में काले रंग के कण दिखाई दिए. इसके अलावा पैकेजिंग पर कई जरूरी जानकारी भी नहीं दी गई थी. साथ ही लैब टेस्ट में यह भी सामने आया कि पानी में फुल्विक एसिड मौजूद था, जो मौजूदा नियमों के अनुसार पैकेज्ड ड्रिंकिंग वॉटर में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं रखता है. FSSAI ने आगे कहा कि खाद्य सुरक्षा और मानक (FSS) अधिनियम, 2006 के तहत औपचारिक कार्यवाही शुरू कर दी गई है. इसके बाद अधिकारियों ने कंपनी के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है.
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क्या होता है फुल्विक एसिड?
फुल्विक एसिड एक तरह का प्राकृतिक कंपाउंड माना जाता है, जो मिट्टी, पौधों और कुछ खनिज पदार्थों में पाया जाता है. कई जगह इसे हेल्थ सप्लीमेंट के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है. दावा किया जाता है कि इससे शरीर को मिनरल्स मिलते हैं और ऊर्जा बढ़ती है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी पदार्थ का इस्तेमाल तय मात्रा और सही जांच के बाद ही सुरक्षित माना जाता है. अगर इसे बिना अनुमति या गलत तरीके से किसी खाने-पीने की चीज में मिलाया जाए, तो यह स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है. इसी वजह से FSSAI ने इसे पैकेज्ड पानी में अनुमति नहीं दी है.
पैकेज्ड पानी को लेकर क्या कहते हैं भारतीय नियम?
भारतीय कानून के तहत, अगर किसी उत्पाद को पैकेटबंद पेयजल के रूप में बेचा जाता है, तो उसे भारतीय मानक ब्यूरो यानी BIS के तय नियमों का पालन करना जरूरी होता है. पैकेटबंद पेयजल के लिए IS 14543 और पैकेटबंद मिनरल वॉटर के लिए IS 13428 जैसे मानक लागू होते हैं. इन नियमों के अनुसार पानी में किसी भी तरह के निलंबित कण, तलछट या अनधिकृत पदार्थ की अनुमति नहीं होती है. यही वजह है कि पानी में मिले काले कण और फुल्विक एसिड को गंभीर मामला माना जा रहा है. यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब अल्कलाइन और मिनरल युक्त पानी शहरी लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है और इसे साधारण पानी से ज्यादा हेल्दी बताकर बेचा जा रहा है.
किन बीमारियों का बढ़ सकता है खतरा?
डॉक्टरों के अनुसार, अगर किसी पानी या खाद्य पदार्थ में अनजान या गैर-मान्य पदार्थ मिला हो, तो उससे पेट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. इसमें उल्टी, दस्त, सिरदर्द, पेट दर्द और एलर्जी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं. साथ ही लंबे समय तक ऐसे पदार्थ शरीर में जाने से लिवर और किडनी पर भी असर पड़ सकता है. इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि किसी भी हेल्थ प्रोडक्ट को खरीदने से पहले उसकी गुणवत्ता और प्रमाणिकता जरूर जांचनी चाहिए.
हेल्थ प्रोडक्ट खरीदते समय बरतें सावधानी
यह मामला लोगों के लिए एक बड़ी सीख भी है. आजकल बाजार में कई ऐसे प्रोडक्ट बिक रहे हैं, जिन्हें “हेल्दी” और “फिटनेस फ्रेंडली” बताकर प्रचारित किया जाता है. लेकिन हर चमकती चीज सुरक्षित हो, यह जरूरी तो नहीं होता है. विशेषज्ञ कहते हैं कि किसी भी पैकेज्ड पानी या हेल्थ ड्रिंक को खरीदते समय उसकी लेबलिंग, FSSAI लाइसेंस और सामग्री की जानकारी जरूर पढ़नी चाहिए. वही अगर पानी का रंग, स्वाद या गंध अलग लगे, तो उसका इस्तेमाल तुरंत बंद कर देना चाहिए. गुजरात का यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि सेहत से जुड़ी चीजों में थोड़ी-सी लापरवाही भी बड़ा नुकसान पहुंचा सकती है.
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