राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को कूड़े के पहाड़ों से मुक्ति दिलाने की दिशा में प्रयास जारी हैं. इस कड़ी में दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू (Taranjit Singh Sandhu) सोमवार (30 मार्च) को भलस्वा लैंडफिल साइट पहुंचे और वहां जारी ‘बायोरेमेडिएशन’ यानी कचरे के जैविक उपचार की प्रक्रिया के प्रयासों में हुई प्रगति का जायजा लिया. इस दौरान उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में काम की गति बढ़ी है, लेकिन अभी बहुत कुछ किए जाने की जरूरत है.
उपराज्यपाल कार्यालय ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि संधू का यह दौरा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दिल्ली के तीन प्रमुख लैंडफिल साइट-भलस्वा, गाजीपुर और ओखला को “कूड़े का पहाड़” बताते हुए उन्हें हटाने का आह्वान करने की पृष्ठभूमि में हुआ है, जिसके बाद वहां 2022 में काम शुरू हुआ था.
Visited the @MCD_Delhi solid waste dump site at Bhalswa Landfill to review the progress of ongoing bioremediation efforts.
After Hon’ble PM Shri @narendramodi Ji had flagged the three major garbage dump sites in Delhi—Bhalswa, Ghazipur, and Okhla Landfills—as “mountains of… pic.twitter.com/0C7aznWDup
— LG Delhi (@LtGovDelhi) March 30, 2026
अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी- तरनजीत सिंह संधू
पोस्ट के मुताबिक, संधू ने कहा, “पिछले एक साल में काफी प्रगति हुई है, लेकिन अभी भी बहुत कुछ किया जाना बाकी है.” पोस्ट के अनुसार, उपराज्यपाल ने अधिकारियों को सलाह दी कि वे अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में उभरती वैश्विक प्रौद्योगिकियों और अंतरराष्ट्रीय मानकों का पता लगाएं तथा विशेषज्ञों से परामर्श करें, ताकि काम में तेजी लाई जा सके.
नये कचरे का भी निपटान करने का निर्देश
इसके साथ ही पोस्ट में कहा गया है कि उपराज्यपाल ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को न केवल लैंडफिल साइट पर पड़े पुराने कचरे, बल्कि लगातार गिराए जा रहे नये कचरे का भी निपटान करने का निर्देश दिया. इसमें कहा गया है कि संधू ने गर्मियों की दस्तक के बीच लैंडफिल साइट पर आग लगने की घटनाओं से बचने के लिए निवारक उपाय किए जाने पर जोर दिया.