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कांकेर में नक्सलियों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई, माओवादियों के 4 स्मारक ध्वस्त, IED बरामद

बस्तर इलाके में नक्सली गतिविधियों को एक बड़ा झटका देते हुए सुरक्षा बलों ने कांकेर जिले के घने जंगलों में माओवादियों द्वारा बनाए गए चार स्मारकों को तोड़ दिया है. साथ ही, बड़ी मात्रा में इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) और विद्रोहियों से जुड़ा अन्य सामान बरामद किया गया.

बताया गया कि, यह ऑपरेशन हापा टोला और बिंगुंडा के दूरदराज के जंगली इलाकों में शुरू किया गया था, जहां संयुक्त टीमों ने गहन तलाशी और इलाके पर अपना दबदबा बनाने का अभियान चलाया. पिछले मुठभेड़ों में मारे गए नक्सलियों के सम्मान में बनाए गए ये स्मारक, विद्रोहियों के लिए प्रचार, भर्ती रैलियों और अपनी विचारधारा को मज़बूत करने के लिए प्रतीकात्मक स्थलों का काम करते थे.

तलाशी के दौरान झाड़ियों से मिला IED

अधिकारियों ने बताया कि इन ढांचों को हटाकर, सुरक्षा बलों का मकसद माओवादियों की मनोवैज्ञानिक पकड़ को कम करना और हिंसा का महिमामंडन करने के लिए इनके इस्तेमाल को रोकना था. इसी तलाशी अभियान के दौरान, सैनिकों ने पेड़ों और झाड़ियों के बीच चालाकी से छिपाए गए चार भारी आईईडी (विस्फोटक) बरामद किए. यह गश्त कर रहे सुरक्षा कर्मियों को निशाना बनाने की एक कोशिश थी. 

सुरक्षा बलों ने जब्त की नक्सलियों की रोजमर्रा की चीचें

बम निरोधक विशेषज्ञों ने इन विस्फोटकों को मौके पर ही सुरक्षित रूप से नष्ट कर दिया, जिससे संभावित जान-माल के नुकसान को टाल दिया गया. आईईडी के अलावा, सुरक्षा बलों ने नक्सलियों से रोजमर्रा के इस्तेमाल की कई चीजें भी जब्त कीं, जिनमें माओवादी विचारधारा को बढ़ावा देने वाला साहित्य और दवाओं का एक जखीरा शामिल था, जो संभवतः जंगल में बने ठिकानों में रहने वाले उनके कैडरों के गुजारे के लिए रखा गया था.

पुलिस ने बरामदगियों को बताई बड़ी सफलता

कांकेर पुलिस ने इन बरामदगियों को एक बड़ी ऑपरेशनल सफलता बताया, साथ ही इस बात पर जोर दिया कि कैसे ऐसे छिपे हुए हथियारों के जखीरे और प्रतीकात्मक स्थल विद्रोहियों की लॉजिस्टिक्स और मनोबल को बनाए रखते हैं. यह कार्रवाई पूरे छत्तीसगढ़ में, खासकर बस्तर संभाग के जिलों जैसे कांकेर में, तेज किए गए नक्सल-विरोधी अभियान के अनुरूप है. इन जिलों में सुरक्षा बलों ने 31 मार्च, 2026 तक वामपंथी उग्रवाद को पूरी तरह खत्म करने के सरकार के घोषित लक्ष्य को पाने के लिए अपने प्रयास तेज कर दिए हैं.

यह घटनाक्रम इस क्षेत्र में आक्रामक ऑपरेशनों के एक व्यापक चलन के बीच सामने आया है. हाल के महीनों में माओवादी कैडरों ने बड़ी संख्या में आत्मसमर्पण किया है. साथ ही, बस्तर के अन्य हिस्सों, जैसे बीजापुर और सुकमा में इसी तरह के कई स्मारकों को ध्वस्त किया गया है. सुरक्षा अधिकारी इस बात पर जोर देते हैं कि इन वैचारिक प्रतीकों को हटाना सामान्य स्थिति बहाल करने, विकास परियोजनाओं को आगे बढ़ाने और स्थानीय समुदायों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए बेहद जरूरी है.

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