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कश्मीर में ताजा बर्फबारी और बारिश से शीतलहर जैसी स्थिति, 20 मार्च तक अलर्ट जारी

कश्मीर घाटी और लद्दाख के ऊंचे पहाड़ी इलाकों में एक बार फिर से मौसम ने करवट ली है. ताजा बर्फबारी और मैदानी इलाकों में झमाझम बारिश के कारण पूरी घाटी में शीतलहर जैसी स्थिति लौट आई है. पिछले कुछ हफ्तों से चल रहे असामान्य रूप से ऊंचे तापमान और गर्मी के दौर पर इस बारिश और बर्फबारी ने पूरी तरह से ब्रेक लगा दिया है.

शोपियां जिले में ऐतिहासिक मुगल रोड पर स्थित ‘पीर की गली’ के पास ताजा बर्फबारी दर्ज की गई है. इसके साथ ही, विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल गुलमर्ग, सोनमर्ग और घाटी के ज्यादातर पहाड़ अब सफेद बर्फ की चादर से ढक गए हैं. रविवार सुबह से ही इन ऊंचे इलाकों में रुक-रुक कर बर्फबारी का सिलसिला जारी है. वहीं, राजधानी श्रीनगर समेत घाटी के निचले और मैदानी इलाकों में लगातार अच्छी बारिश हुई है, जिससे पूरे क्षेत्र को बहुप्रतीक्षित राहत मिली है और पानी की जरूरतें पूरी हुई हैं.

तापमान में भारी गिरावट

लगातार हो रही बारिश और बर्फबारी की वजह से तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई है. मंगलवार को श्रीनगर में अधिकतम तापमान 14.9 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से करीब एक डिग्री कम है. घाटी के अन्य मौसम केंद्रों पर भी तापमान सामान्य से नीचे लुढ़क गया है. पिछले कुछ दिनों से आसमान में बादल छाए रहने के कारण दिन में खासी ठंडक बढ़ गई है, जबकि रातें अपेक्षाकृत गर्म महसूस हो रही हैं.

मौसम विभाग का पूर्वानुमान और अलर्ट

मौसम विभाग ने आगामी 20 मार्च तक मौसम के अस्थिर रहने का अनुमान जताया है. इस दौरान भारी बर्फबारी की संभावना: चिनाब घाटी और दक्षिण कश्मीर के कुछ ऊंचे इलाकों में मध्यम से भारी बर्फबारी हो सकती है. अन्य जगहों पर रुक-रुक कर हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी जारी रहेगी.

  • तूफान और ओलावृष्टि: 20 मार्च तक 40-50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने, गरज के साथ छींटे पड़ने और कुछ अलग-अलग जगहों पर ओलावृष्टि की भी चेतावनी जारी की गई है.
  • आगे का मौसम: 26 से 28 मार्च के बीच एक बार फिर मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है, जिससे ऊंचे इलाकों में हल्की बारिश या बर्फबारी हो सकती है.

किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी

लगातार खराब होते मौसम और ओलावृष्टि की भारी आशंका को देखते हुए मौसम विभाग ने किसानों के लिए सतर्कता बरतने को कहा है. किसानों को सख्त सलाह दी गई है कि वे 20 मार्च तक खेतों और बागानों से जुड़े अपने सभी कृषि कार्यों को पूरी तरह रोक दें, ताकि फसलों को होने वाले किसी भी संभावित नुकसान से बचा जा सके.

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