उत्तरी मुंबई के कांदिवली इलाके में रहने वाले सोलंकी परिवार के लिए नियति बेहद क्रूर साबित हुई है. अभी परिवार अपनी मुखिया (मां) की मृत्यु के शोक से उबर भी नहीं पाया था कि ओमान की खाड़ी में हुए एक भीषण हमले ने परिवार के सबसे छोटे और कमाऊ सदस्य, दीक्षित अमृतलाल सोलंकी (33) की जान ले ली. एक महीने के भीतर परिवार में हुई इन दो मौतों ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है.
मिली जानकारी के अनुसार, मस्कट गवर्नरेट के तट से लगभग 52 समुद्री मील दूर ओमान की खाड़ी में एक तेल टैंकर पर विस्फोटकों से लदी ड्रोन नौका ने आत्मघाती हमला किया. दीक्षित सोलंकी इस टैंकर पर ‘ऑयलर’ के पद पर तैनात थे. विस्फोट के बाद शुरुआती घंटों में उन्हें लापता बताया गया था, लेकिन बाद में उनके निधन की पुष्टि कर दी गई.
मां के अंतिम संस्कार के बाद लौटे थे ड्यूटी पर
‘नेशनल यूनियन ऑफ सीफेरर्स ऑफ इंडिया’ (एनयूएसआई) के सुरेश सोलंकी ने बताया कि दीक्षित करीब एक महीने पहले ही अपनी मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए मुंबई आए थे. कुछ समय घर पर बिताने के बाद वे दोबारा अपनी ड्यूटी पर लौटे थे, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उनकी आखिरी विदाई होगी.
सदमे में पिता, पड़ोसियों ने बताया जांबाज
दीक्षित के पिता अमृतलाल सोलंकी, जो स्वयं एक पूर्व नौसेवक रहे हैं, इस दोहरे वज्रपात के बाद बोलने की स्थिति में नहीं हैं. दीक्षित की बड़ी बहन दुबई में रहती हैं और वे भी इस खबर के बाद गहरे सदमे में हैं. पड़ोसियों के अनुसार, दीक्षित एक बेहद मेहनती और समर्पित पेशेवर थे, जिन्होंने परिवार की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा रखी थी.
समुद्री सुरक्षा पर गहराते सवाल
खाड़ी देशों के समुद्री मार्ग में बढ़ते ड्रोन हमलों ने भारतीय नौसेवकों की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. एनयूएसआई और अन्य संगठन अब इस मामले में अंतर्राष्ट्रीय हस्तक्षेप और मृतक के परिवार के लिए उचित मुआवजे की मांग कर रहे हैं.