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उत्तराखंड में तेल की किल्लत या महज अफवाह? देहरादून से जानें क्या है ग्राउंड रिपोर्ट

मिडिल ईस्ट में जंग की आग भड़की और उसकी तपिश हिंदुस्तान के पेट्रोल पंपों तक आ पहुंची. सोशल मीडिया पर तेल की किल्लत की अफवाहें उड़ने लगीं, कहीं-कहीं पंपों पर भीड़ भी जुटी. लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि देश में तेल की कोई कमी नहीं है और उत्तराखंड की राजधानी देहरादून भी इससे अछूती नहीं है, यहां भी पर्याप्त मात्रा में तेल उपलब्ध है.

फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया पेट्रोलियम ट्रेडर के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव अमरजीत सेठी ने साफ शब्दों में कहा कि किसी भी तरह का पैनिक करने की जरूरत नहीं है. आपूर्ति सामान्य है और व्यापारियों के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है.

युद्ध ने बिगाड़ा अंतरराष्ट्रीय बाजार का समीकरण

असली समस्या किल्लत की नहीं, कीमतों की है. ईरान और कतर के अहम ऊर्जा ढांचे पर हुए सैन्य हमलों के बाद वैश्विक बाजार में कच्चा तेल 119 डॉलर प्रति बैरल के खतरनाक स्तर तक जा पहुंचा. सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हुई और तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ता गया.

इसी दबाव का नतीजा यह निकला कि देश की सबसे बड़ी प्राइवेट फ्यूल रिटेलर कंपनी नायरा एनर्जी ने पेट्रोल के दाम 5 रुपए और डीजल के दाम 3 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ा दिए और ये नई कीमतें तत्काल प्रभाव से लागू भी हो गईं. कुछ राज्यों में स्थानीय VAT की वजह से पेट्रोल 5.30 रुपए प्रति लीटर तक महंगा हो गया.

सूत्रों के मुताबिक रूसी कंपनी रोसनेफ्ट के बैकअप वाली नायरा एनर्जी के पूरे देश में करीब 6,967 पेट्रोल पंप हैं. सरकारी कंपनियों के विपरीत इन्हें घाटे की भरपाई सरकार नहीं करती, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार की मार सीधे इनके दामों में दिखती है. 

सरकारी पंपों पर फिलहाल राहत, लेकिन प्रीमियम तेल हुआ महंगा

आम आदमी के लिए थोड़ी राहत की बात यह है कि बाजार के 90 फीसदी हिस्से पर काबिज सरकारी तेल कंपनियों IOCL और HPCL ने अभी तक सामान्य पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाए हैं.

लेकिन 20 मार्च को इन्होंने भी प्रीमियम पेट्रोल जैसे XP95 और Power के दाम 2.09 से 2.35 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ा दिए, जिससे इनकी कीमत 113.77 रुपए के करीब जा पहुंची है.

व्यापारियों की अपील अफवाह पर ध्यान न दें

अमरजीत सेठी का कहना है कि इस तरह की अफवाहें बाजार में अनावश्यक भगदड़ मचाती हैं. जब लोग एक साथ ज्यादा तेल भरवाने निकलते हैं तो पंप पर अस्थायी दबाव जरूर बनता है और यही भीड़ देखकर लोगों को लगता है कि सच में किल्लत है. जबकि वास्तव में स्टॉक पूरा है. उनकी अपील है कि जरूरत के मुताबिक तेल भरवाएं, घबराकर कनस्तर लेकर न निकलें और किसी भी अपुष्ट खबर को आगे शेयर करने से बचें.

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