उत्तराखंड खनन विभाग ने राजस्व प्राप्ति के मामले में नया इतिहास रचते हुए अब तक के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. विभाग ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में निर्धारित लक्ष्य से अधिक राजस्व अर्जित कर राज्य के राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान दिया है.
वित्त विभाग की ओर से खनन विभाग को वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 950 करोड़ रुपये का राजस्व लक्ष्य दिया गया था. इसके सापेक्ष विभाग ने फरवरी 2026 तक ही 965 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित कर लिया है. इस प्रकार वित्तीय वर्ष की समाप्ति से पहले ही विभाग ने निर्धारित लक्ष्य को पार कर लिया है.
खनन राजस्व के लिए नई उपलब्धि
विभाग के अधिकारियों के अनुसार यदि यही गति बनी रही तो वित्तीय वर्ष के अंत तक राजस्व प्राप्ति लगभग 1100 करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है. यह आंकड़ा राज्य के खनन राजस्व के लिए एक नई उपलब्धि साबित हो सकता है.
यदि पिछले वर्ष की बात करें तो वित्तीय वर्ष 2024-25 में खनन विभाग को 875 करोड़ रुपये का लक्ष्य दिया गया था. इसके मुकाबले विभाग ने 1041 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया था, जो उस समय तक का सबसे अधिक राजस्व था. अब चालू वित्तीय वर्ष में भी विभाग बेहतर प्रदर्शन करते हुए नए रिकॉर्ड की ओर बढ़ रहा है.
इस सफलता के पीछे क्या रही वजह?
खनन विभाग की इस सफलता के पीछे तकनीकी सुधारों और निगरानी प्रणाली की बड़ी भूमिका मानी जा रही है. विभाग के दो प्रमुख प्रोजेक्ट MDTSS (माइनिंग डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन एंड सर्विलांस सिस्टम) और ई-रवन्ना सिक्योरिटी पेपर को राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित स्कॉच अवार्ड 2025 के लिए चुना गया है.
इन आधुनिक परियोजनाओं के माध्यम से अवैध खनन, परिवहन और भंडारण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया है. इसके साथ ही खनन गतिविधियों की निगरानी अधिक पारदर्शी और डिजिटल तरीके से की जा रही है.
अधिकारियों का कहना है कि इन तकनीकी व्यवस्थाओं के लागू होने के बाद राजस्व प्राप्ति में पिछले वर्षों की तुलना में लगभग चार गुना तक वृद्धि दर्ज की गई है. खनन विभाग की यह उपलब्धि राज्य के लिए एक बड़ी आर्थिक उपलब्धि मानी जा रही है.