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ईरान-इजरायल युद्ध का जयपुर ज्वेलरी मार्केट पर असर, एक्सपोर्ट-इंपोर्ट 30% तक प्रभावित

अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के साथ किए जा रहे युद्ध का असर जयपुर के ज्वेलरी मार्केट पर भी देखने को मिल रहा है. जयपुर का ज्वेलरी मार्केट अकेले राजस्थान ही नहीं बल्कि देश भर में लोगों को खूब पसंद आता है. सात समंदर पार चल रहे युद्ध की वजह से जयपुर में ज्वेलरी के एक्सपोर्ट और इंपोर्ट का काम तकरीबन तीस फीसदी तक प्रभावित हो चुका है. इसके अलावा अनिश्चितताओं के चलते बाजार में भी सन्नाटा सा पसरा हुआ है.

राहत की बात सिर्फ इतनी है कि युद्ध की वजह से गोल्ड और सिल्वर की कीमतों में आग लगने की जो आशंका जताई जा रही थी, वह गलत साबित हुई है. गोल्ड और सिल्वर के दाम बढ़ने के बजाय कुछ कम हो गए हैं. शुक्रवार को जयपुर के जोहरी बाजार में 22 कैरेट का सोना 1.53 लाख प्रति दस ग्राम की कीमत में बिका तो वहीं चांदी 2.71 लाख रुपए किलो से आगे नहीं गई.

जयपुर से खाड़ी देशों में एक्सपोर्ट होती है ज्वैलरी 

जयपुर के जौहरी मार्केट के एक्सपर्ट और ज्वेलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कैलाश मित्तल के मुताबिक जयपुर से सबसे ज्यादा ज्वैलरी खाड़ी देशों में ही एक्सपोर्ट होती है. युद्ध की वजह से एक्सपोर्ट का काम तकरीबन एक तिहाई तक प्रभावित हो चुका है. उनके मुताबिक जब एक्सपोर्ट कम हो गया है तो उसका सीधा असर इंपोर्ट यानी आयात पर भी पड़ता है. उसी अनुपात में आयात भी कम हुआ है. उनका कहना है कि बाजार को संभलने में एक से दो महीने का वक्त लग सकता है. उसके बाद युद्ध लंबा खिंचने पर भी बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा. उनका कहना है कि बड़े कारोबारियो के साथ ही कारीगर और लेबर क्लास पर भी इसका असर पड़ रहा है.

बाजारों में पसरा सन्नाटा

जयपुर का जौहरी बाजार होली की छुट्टियों के बाद वैसे भी कुछ दिनों तक सुस्त पड़ा रहता है, लेकिन इस बार युद्ध के चलते बाजारों में कुछ ज्यादा ही सन्नाटा पसरा हुआ है. ज्वेलरी कारोबारी आरसी मित्तल के मुताबिक लोग अभी बाजार का रुख देख रहे हैं. उन्हें इस बात का भी डर है कि आने वाले दिनों में महंगाई और मंदी बढ़ सकती है. ऐसे में लोग अभी खरीदारी करने से बच रहे हैं. हालांकि उनका कहना है कि कुछ दिनों बाद शादी ब्याह का सीजन शुरू होने वाला है, इसलिए रिटेल यानी घरेलू मार्केट फिर से पटरी पर आ जाएगा, क्योंकि लोग शादी के लिए खरीददारी करेंगे ही. उन्हें इस बात का डर है कि अगर युद्ध लंबा खींच तो यूरोप और खाड़ी देशों से आने वाले पर्यटकों की संख्या घटेगा और इसका सीधा असर यहां के ज्वेलरी कारोबार पर पड़ेगा.

वैसे जो लोग ज्वेलरी शोरूम में गोल्ड और सिल्वर खरीदने के लिए पहुंच रहे हैं, उनमें से ज्यादातर का कहना है कि फिलहाल वह शादी जैसी जरूरत के लिए ही खरीदारी कर रहे हैं, लेकिन इसे इन्वेस्टमेंट के लिहाज से भी जरूर रखना चाहेंगे. कहा जा सकता है कि इंपोर्ट और एक्सपोर्ट के काम से जुड़े कारोबारी युद्ध के जल्द से जल्द खत्म होने दुआ कर रहे हैं तो वहीं रिटेल कारोबारी शादियों का सीजन शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं. युद्ध का असर निश्चित तौर पर जयपुर के ज्वेलरी मार्केट पर देखने को मिल रहा है.

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