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ईरान-इजरायल युद्ध का असर, जयपुर के मंदिरों में गैस का संकट, प्रसाद बनने पर मंडराया खतरा

अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे ईरान के तनाव का असर अब सात समंदर पार भारत के बाजारों और आम जनजीवन के साथ-साथ लोगों की आस्था पर भी पड़ने लगा है. युद्ध के कारण उपजे सप्लाई चैन संकट से भारत में घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडरों की भारी किल्लत शुरू हो गई है. इस गैस संकट का असर केवल रसोई या होटलों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब मंदिरों में भगवान को चढ़ने वाले ‘प्रसाद’ के निर्माण पर भी इसका गहरा संकट मंडराने लगा है.

मोती डूंगरी गणेश मंदिर में गहराया संकट

पिंक सिटी जयपुर के आराध्य ‘मोती डूंगरी गणेश मंदिर’ में रोजाना हजारों की संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं. मान्यता के अनुसार, श्रद्धालु यहाँ गजानन को लड्डू और मोदक अर्पित करते हैं. मंदिर परिसर और उसके बाहर स्थित प्रसाद की दर्जनों दुकानों पर ये मिठाइयां कमर्शियल गैस सिलेंडरों के जरिए ही बड़े पैमाने पर तैयार की जाती हैं. लेकिन गैस सप्लाई बाधित होने से अब इन मिष्ठान भंडारों के सामने प्रसाद तैयार करने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है.

ब्लैक में 300 रुपये महंगा सिलेंडर खरीदने को मजबूर कारोबारी

मंदिर की मुख्य इमारत के ठीक बगल में प्रसाद की दुकान चलाने वाले कृष्णा सैनी ने जमीनी हकीकत बताते हुए कहा कि गैस की किल्लत के कारण हालात बिगड़ने लगे हैं. पिछले दो दिनों से उन्हें मजबूरी में ‘ब्लैक’ में गैस सिलेंडर खरीदना पड़ रहा है. प्रति कमर्शियल सिलेंडर उन्हें लगभग 300 रुपये अतिरिक्त (Extra) चुकाने पड़ रहे हैं. कारोबारियों को डर है कि यदि कमर्शियल सिलेंडर पूरी तरह से मिलने बंद हो गए या कीमतें अत्यधिक बढ़ गईं, तो प्रसाद तैयार करना कतई आसान नहीं रह जाएगा.

श्रद्धालुओं की चिंता और सरकार से गुहार

इस गैस संकट ने केवल कारोबारियों को ही नहीं, बल्कि आस्थावान श्रद्धालुओं को भी चिंतित कर दिया है. मोती डूंगरी पहुंचे तमाम श्रद्धालुओं का कहना है कि भगवान गणेश को प्रसाद का भोग लगाए बिना उनकी पूजा और दर्शन कैसे पूरे होंगे? बिना प्रसाद के भगवान का आशीर्वाद कैसे हासिल होगा?

श्रद्धालुओं ने स्पष्ट तौर पर मांग की है कि सरकार को इस मामले में तुरंत दखल देना चाहिए. लोगों की अपील है कि कम से कम मंदिरों के प्रसाद निर्माण के लिए गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए.

हालांकि, यह समस्या केवल मोती डूंगरी गणेश मंदिर तक ही सीमित नहीं है. गैस सिलेंडरों की इस किल्लत का असर धीरे-धीरे जयपुर समेत पूरे राजस्थान के अन्य प्रमुख मंदिरों की प्रसाद व्यवस्था पर भी पड़ना शुरू हो गया है.

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