बहुजन समाज पार्टी (BSP) के संस्थापक कांशीराम की विरासत को लेकर उत्तर प्रदेश में सियासी घमासान तेज हो गया है. यूपी सरकार में समाज कल्याण मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के उस बयान पर तीखा पलटवार किया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि ‘नेहरू होते तो कांशीराम कांग्रेस से मुख्यमंत्री होते’. अरुण ने राहुल के इस दावे को पूरी तरह ‘बनावटी’ करार देते हुए कहा कि उन्हें इतिहास और भूगोल का कोई ज्ञान नहीं है.
शुक्रवार (14 मार्च) को लखनऊ में आयोजित ‘संविधान सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने दलित नायक कांशीराम को श्रद्धांजलि अर्पित की थी. इसी दौरान उन्होंने दावा किया था कि “अगर जवाहरलाल नेहरू जीवित होते, तो कांशीराम कांग्रेस की तरफ से मुख्यमंत्री बनाए गए होते.”
‘कांग्रेस ने जीते जी सम्मान नहीं दिया’
राहुल गांधी के इस बयान के बाद राज्य मंत्री असीम अरुण ने एक बयान जारी कर कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा. अरुण ने कहा कि कांशीराम ने बसपा की स्थापना ही विशेष रूप से कांग्रेस के विरोध में की थी. राहुल गांधी को उनकी लिखी किताब ‘चमचा युग’ पढ़नी चाहिए, जिसमें कांग्रेस द्वारा दलितों के शोषण का विस्तृत वर्णन है.
चाटुकार नेताओं की चाह
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की नीतियां ऐसी थीं कि कोई दलित नेता सिर उठाकर न चल सके; कांग्रेस दलित समुदाय से केवल ‘चाटुकार’ नेता ही चाहती थी. अरुण ने कहा, “सच तो यह है कि कांग्रेस ने कांशीराम को अछूत की तरह माना और जीते जी उन्हें कभी सम्मान नहीं दिया. अब राहुल गांधी सिर्फ वोट पाने के लिए यह सब दिखावा कर रहे हैं.”
‘आज जीवित होते तो बीजेपी के साथ होते कांशीराम’
असीम अरुण ने याद दिलाया कि कांशीराम के मार्गदर्शन में ही बसपा ने तीन अलग-अलग मौकों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ गठबंधन किया था. उनका मानना है कि अगर कांशीराम आज जीवित होते, तो वे संभवतः बीजेपी के ही सबसे करीब होते.
विरासत की असली हकदार मायावती
मंत्री ने स्पष्ट किया कि चुनाव नजदीक आते देख समाजवादी पार्टी (SP) और कांग्रेस दोनों ही कांशीराम की विरासत पर झूठा दावा ठोक रही हैं, जबकि वास्तविकता में उनका इससे कोई संबंध नहीं है. उन्होंने कहा कि बसपा प्रमुख मायावती ही इस विरासत की सबसे प्रबल और असली हकदार हैं, क्योंकि वे भली-भांति जानती हैं कि सपा और कांग्रेस ने दलितों के साथ कैसा बर्ताव किया है.