मध्य पूर्व में युद्ध की आशंकाओं के बीच देश भर में गहराए गैस संकट का सीधा असर अब मध्य प्रदेश के इंदौर और इसके ग्रामीण अंचलों में साफ दिखने लगा है. इंदौर के देपालपुर सहित कई गांवों में एलपीजी (LPG) के लिए त्राहिमाम मचा है और गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें लगी हैं.
इस पैनिक बुकिंग (घबराहट में खरीदारी) को रोकने के लिए सरकार और तेल कंपनियों ने इंदौर सहित सभी ग्रामीण क्षेत्रों में गैस बुकिंग के नियमों में बड़ा बदलाव कर दिया है. अब ग्रामीण उपभोक्ता एक सिलेंडर लेने के 45 दिन बाद ही अगली बुकिंग कर सकेंगे, जिससे गांव की महिलाओं में भारी आक्रोश है.
गांवों में बुकिंग का नियम बदला, अब 45 दिन की ‘वेटिंग’
पैनिक बुकिंग रोकने और सप्लाई चैन को दुरुस्त करने के लिए सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में गैस बुकिंग की अवधि बढ़ा दी है. अब ग्रामीण इलाकों में एक सिलेंडर लेने के बाद अगली बुकिंग 45 दिन के अंतराल के बाद ही की जा सकेगी (पहले यह अवधि 21 दिन थी). पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में स्पष्ट किया है कि यह फैसला बेवजह की पैनिक बुकिंग पर रोक लगाने के लिए लिया गया है.
पहले ग्रामीण उपभोक्ता औसतन 55 दिनों में सिलेंडर बुक कराते थे, लेकिन हाल के दिनों में अफवाहों के चलते लोग 10 से 15 दिन में ही धड़ाधड़ बुकिंग करने लगे थे, जिससे सिस्टम चरमरा गया.
‘क्या फिर से जंगल से लकड़ी लानी पड़ेगी?’
सरकार के इस फैसले से बड़े परिवारों वाली ग्रामीण महिलाओं के सामने रोजी-रोटी और खाना पकाने का भारी संकट खड़ा हो गया है. देपालपुर गांव की रहने वाली रानू राव ने सरकार से गुहार लगाते हुए कहा, “हमारा परिवार बड़ा है, 45 दिन तक एक टंकी कैसे चलेगी? सरकार इसे घटाकर 15-20 दिन करे. अगर गैस नहीं मिली तो बच्चों को भूखा तो नहीं रखेंगे, हमें फिर से चूल्हा फूंकना पड़ेगा और लकड़ी लेने जंगल जाना पड़ेगा. हम मजदूरी करें या जंगल जाएं?” वहीं, शांति बाई का भी स्पष्ट कहना है कि पुरानी व्यवस्था ही लागू रहनी चाहिए, ताकि आम आदमी को परेशान न होना पड़े.
‘गांवों में लकड़ी-कंडे जलते हैं, वहां खपत कम है’
जमीनी हकीकत और महिलाओं की परेशानी से अलग, जिला प्रशासन का तर्क बिल्कुल जुदा है. इंदौर जिले के खाद्य आपूर्ति एवं नियंत्रक अधिकारी मोहन मारू ने कहा कि गांवों में गैस की कोई किल्लत नहीं है. उन्होंने अजीब तर्क देते हुए कहा, “शहरी क्षेत्रों में 21 से 25 दिन का बुकिंग समय निर्धारित है. चूंकि ग्रामीण क्षेत्रों में लकड़ी, कंडा और सिगड़ी का उपयोग ज्यादा होता है, इसलिए वहां गैस की खपत कम है. इसी वजह से कंपनियों ने गांवों के लिए 45 दिन का समय तय किया है.” हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर आगे कोई गंभीर शिकायत आती है, तो जिला प्रशासन उचित निर्णय लेगा.
सर्वर डाउन: एमपी के कई शहरों में हाहाकार
नियमों की सख्ती के बीच मध्य प्रदेश में तकनीकी खामियों ने कोढ़ में खाज का काम किया है. सर्वर डाउन होने के कारण राज्य में ऑनलाइन गैस बुकिंग लगभग ठप पड़ी है. भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर सहित कई प्रमुख शहरों में उपभोक्ता गैस बुक नहीं कर पा रहे हैं. वेटिंग पीरियड बढ़कर 7 से 8 दिन तक पहुंच गया है और गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से शाम तक लोगों की भारी भीड़ जमा हो रही है. प्रशासन और तेल कंपनियां सर्वर को ठीक कर हालात सामान्य करने में जुटी हुई हैं.