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‘अमेरिका का आदेश नहीं मानता भारत’, ईरान-इजरायल तनाव के बीच बोले VHP अध्यक्ष, तेल पर भी दिया बयान

विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने अंतरराष्ट्रीय हालात और इजरायल-ईरान के बीच चल रहे युद्ध को लेकर कहा कि युद्ध की वजह से कुछ समस्याएं जरूर खड़ी हो सकती हैं, लेकिन शुरुआत में जितना डर था उतनी बड़ी स्थिति फिलहाल दिखाई नहीं दे रही है. उन्होंने कहा कि भारत के पास पर्याप्त मात्रा में ईंधन का भंडार मौजूद है और करीब 25 दिनों का स्टॉक उपलब्ध है.

आलोक कुमार ने बताया कि भारत रूस और अमेरिका दोनों से तेल का आयात कर रहा है. ऐसे में यदि युद्ध बहुत लंबे समय तक नहीं चलता है तो भारत इस स्थिति से आसानी से पार पा सकता है. उन्होंने यह बयान अयोध्या में पत्रकारों से बातचीत में दिया.

30 दिन के आदेश को गंभीरता से न लेने की सलाह

अमेरिका द्वारा भारत को दिए गए 30 दिन के समय को लेकर उन्होंने कहा कि अमेरिका अपने यहां कुछ भी लिख सकता है, लेकिन भारत अमेरिका के आदेशों पर नहीं चलता. भारत अपने विवेक से निर्णय लेने वाला देश है और जितनी आवश्यकता होगी उतना तेल जहां से जरूरी होगा वहां से खरीदेगा.

राष्ट्रपति के स्वागत के लिए तैयार अयोध्या

राम मंदिर में राष्ट्रपति के प्रस्तावित आगमन को लेकर उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति देश की प्रथम नागरिक हैं और वह निमंत्रण पर अयोध्या आ रही हैं. उनके स्वागत के लिए देश के प्रमुख लोग, संत समाज और मंदिर निर्माण में योगदान देने वाले लोग मौजूद रहेंगे. उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति राम मंदिर में राम यंत्र की स्थापना करेंगी और उपस्थित लोगों को संबोधित भी करेंगी.

राम मंदिर की सुरक्षा के सवाल पर आलोक कुमार ने कहा कि सुरक्षा को लेकर सरकार पूरी तरह सचेत है और उन्हें पूरा विश्वास है कि राम मंदिर पूरी तरह सुरक्षित रहेगा.

युद्ध में भारत अपनी भूमिका को लेकर सजग

ईरान से जुड़े मुद्दों को लेकर भारत में हो रहे प्रदर्शनों पर उन्होंने कहा कि इस युद्ध में भारत की कोई हिस्सेदारी नहीं है और भारत चाहता है कि बातचीत और शांति के जरिए इसका समाधान निकले. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री लगातार विभिन्न देशों से बातचीत कर रहे हैं और यदि शांति स्थापना में भारत की कोई भूमिका बनती है तो भारत उसे जरूर निभाएगा.

उन्होंने कहा कि समाज का एक वर्ग ईरान के नेता को अपना प्रमुख मानता रहा है और उनकी हत्या के बाद लोग शोक व्यक्त करना चाहते हैं. अगर कोई शांतिपूर्ण ढंग से शोक व्यक्त करता है तो उसे अनुमति मिलनी चाहिए, लेकिन यदि इससे आगे कोई स्थिति बनती है तो कानून अपना काम करेगा.

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