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अपनों की सलामती और युद्ध रुकने के लिए दुआ, खाड़ी देशों में फंसे हैं मुरादाबाद के कई लोग

इजरायल अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध के कारण अरब और खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीय मजदूरों की जान भी अब मुसीबत में है. भारत में रह रहे उनके परिवार वाले उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और युद्ध के रुकने की दुआ कर रहे हैं. उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद के सैकड़ों लोग सऊदी अरब और यूएई सहित कई खाड़ी देशों में काम कर रहे हैं. युद्ध के बाद बने तनाव से उनके परिवार की चिंताएं बढ़ गई है. परिवार के लोग अपनों की सलामती की दुआ मांग रहे हैं.

दरअसल, मुरादाबाद के नागफनी थाना इलाके के रहने वाले भूरे भाई बताते हैं कि उनका बेटा और दामाद कामरान यूएई में बार्बर का काम करते हैं. बेटा कुछ दिन पहले छुट्टी पर घर आया था, वह यहीं है. जबकि दामाद वहीं फंसे हुए हैं, उनकी सुरक्षा की फिक्र सता रही है. उन्होंने बताया कि एक दिन तो ईरान के हमले की वजह से उस बिल्डिंग को खाली करा लिया गया था, जिसमे उनके दामाद रहते हैं. हालांकि, वह अब सुरक्षित जगह पर है लेकिन फिर भी उनकी चिंता सता रही है.

‘हमलों के कारण सता रही चिंता’

इसी तरह बंगला गांव इलाके के शकील अहमद बताते हैं कि उनके बड़े भाई मोहम्मद अकील रियाद में 25 सालों से रह रहे हैं, सब कुछ ठीक चल रहा था लेकिन अब युद्ध के कारण रियाद में सब बंद हो गया है. ईरान के हमलों के कारण उनकी सुरक्षा की चिंता हो रही है, क्यूंकि हवाई उड़ाने बंद हैं. इसलिए वह घर भी नहीं आ पा रहे हैं. उन्होंने कहा कि हम तो यही चाहते हैं कि ये जंग रुक जाये और सब कुछ पहले जैसा शुरू हो जाये. 

वापस आने के लिए नहीं मिल रहीं फ्लाइट्स

जिगर कालोनी निवासी निजामुद्दीन बताते हैं कि उनके भाई सऊदी अरब में काम करते हैं. वहां युद्ध के कारण खतरा बना हुआ है, कभी भाई से बात हो पाती है और कभी बात भी नहीं हो पाती जिससे चिंता बढ़ जाती है. उन्होंने बताया कि वहां सब काम बंद हो गया है, इसलिए वह वापस आना चाहते हैं, मगर वापस आने के लिए अभी फ्लाइट्स नहीं मिल रही हैं.

परिवार के सामने गहराया आर्थिक संकट

परिवार वालों का कहना है की वहां से जो पैसा वह भेजते हैं उस से परिवार का खर्च चलता है अगर लड़ाई लम्बी चली तो परिवार के सामने आर्थिक संकट बढ़ जायेगा. तनावपूर्ण हालात को देखते हुए परिवार वाले यही चाहते हैं प्रवासी भारतीय मजदूर अरब और खाड़ी देशों से सकुशल भारत वापस लौट आयें और सरकार से उन्हें मदद की उम्मीद है.

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