असम में सुखोई फाइटर प्लेन क्रैश में शहीद हुए एयरफोर्स के स्क्वाड्रन लीडर अनुज शर्मा का शनिवार (7 फरवरी) को उनके पैतृक गांव ककराना में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया. उनके छोटे भाई मनुज ने उन्हें मुखाग्नि दी. शहीद अनुज को अंतिम विदाई देने के लिए गांव में बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि दी.
दोपहर को जैसे ही अनुज शर्मा का पार्थिव शरीर रोहतक जिले के ककराना गांव पहुंचा, परिवार के सदस्यों और ग्रामीणों का जनसैलाब उमड़ पड़ा. लोगों ने ‘भारत माता की जय’ और ‘शहीद अनुज शर्मा अमर रहें’ के नारों के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी. इस दौरान रोहतक से कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा और हरियाणा सरकार में मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की.
‘अनुज की शहादत ने पूरे क्षेत्र का नाम ऊंचा किया है’- मंत्री अरविंद शर्मा
मंत्री अरविंद शर्मा ने कहा कि यह शहादत देश के लिए बहुत बड़ी क्षति है. आज पूरा देश शोक में डूबा हुआ है. अनुज की शहादत ने ककराना गांव और पूरे क्षेत्र का नाम ऊंचा किया है. उन्होंने कहा कि देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सपूत को पूरा देश कभी नहीं भूलेगा. बताया जा रहा है कि अनुज शर्मा का रिश्ता तय हो चुका था और परिवार में सगाई व शादी की तैयारियां चल रही थीं. जिनसे उनकी शादी होनी थी, वह भी भारतीय वायुसेना में पायलट हैं लेकिन शादी से पहले ही अनुज देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए.
स्क्वाड्रन लीडर अनुज शर्मा का जन्म 9 अगस्त 1993 को रोहतक जिले के ककराना गांव में हुआ था. जब वे करीब 7 साल के थे तो उनका परिवार गुरुग्राम में जाकर बस गया. उनकी पढ़ाई-लिखाई भी गुरुग्राम में ही हुई. पढ़ाई में होनहार अनुज का साल 2015 में भारतीय वायुसेना में चयन हुआ था. ट्रेनिंग पूरी करने के बाद 2016 में जब वे पहली बार गांव लौटे तो ग्रामीणों ने उनका भव्य स्वागत किया था.
शहीद अनुज के पिता भी भारतीय सेना में सूबेदार के पद से रिटायर
अनुज के पिता आनंद शर्मा भारतीय सेना में सूबेदार पद से रिटायर हैं. पिता से प्रेरणा लेकर ही अनुज ने भारतीय वायुसेना जॉइन की थी. परिवार में उनके छोटे भाई मनुज भी हैं, जो बीटेक की पढ़ाई के बाद इंग्लैंड में नौकरी करते हैं. भाई के शहीद होने की खबर मिलते ही मनुज भारत लौट आए. भारतीय वायुसेना के अनुसार SU-30 MKI लड़ाकू विमान ने असम के जोरहाट एयरबेस से गुरुवार शाम नियमित अभ्यास उड़ान भरी थी.
विमान में स्क्वाड्रन लीडर अनुज वशिष्ठ और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पूर्वेश दुरागकर सवार थे. उड़ान भरने के कुछ समय बाद ही शाम करीब 7 बजकर 42 मिनट पर विमान का एयर ट्रैफिक कंट्रोल से संपर्क टूट गया और वह रडार से गायब हो गया.
इसके बाद वायुसेना ने तुरंत सर्च ऑपरेशन शुरू किया. तलाश के दौरान पता चला कि विमान जोरहाट से करीब 60 किलोमीटर दूर कार्बी आंगलोंग के घने जंगलों में क्रैश हो गया. वायुसेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर जानकारी साझा करते हुए दोनों अधिकारियों के शहीद होने की पुष्टि की.